1.
AUD-20180606-WA0018_Chapter 3-4 Shloka 110-113, Shloka 1-4_श्रीअद्वैत आचार्
2.
AUD-20180605-WA0014_Shloka 107-110_सासंग भजन Vs अनासंग साधन _भक्तों की इच
3.
AUD-20180604-WA0004_Shloka_Shloka 103-107_श्रीकृष्ण पूजा में तुलसी मंजरी का
4.
AUD-20180603-WA0004_Shloka 95-103_श्रीअद्वैत आचार्य जी द्वारा कृष्ण को जगत
5.
AUD-20180525-WA0013_ Shloka 95-96_श्रीअद्वैत तत्व
6.
AUD-20180524-WA0013_ Shloka 85-94_ जगत में दो प्रकार के प्राणी
7.
AUD-20180523-WA0013_Shloka 84_ नवद्वीप बिहारी श्रीकृष्ण चैतन्य ही शास्त्र
8.
AUD-20180522-WA0016_Shloka 77-83_श्रीकृष्ण चैतन्य अवतार के प्रमाण
9.
AUD-20180521-WA0013_ Shloka 74-78_श्रीकृष्ण नाम की महिमा_कर्मकांड के अनुष्ठ
10.
AUD-20180520-WA0019_Shloka 71-73_ महाप्रभु के दो अंग
11.
AUD-20180519-WA0007_Shloka 62-70_गौर दर्शन का फल
12.
AUD-20180518-WA0015_ Shloka 60-62_भक्ति विरोधी कल्मष
13.
AUD-20180517-WA0019_Shloka 53-59_कलियुग के जीवों की स्थिति
14.
AUD-20180516-WA0015_Shloka 51-52_कृष्णवर्णं त्विषा_श्लोक की व्याख्या
15.
AUD-20180515-WA0006_Shloka 47-51_महाप्रभु के आदि (गृहस्थ लीला) और शेष (सन्
16.
AUD-20180514-WA000_Shloka 35-46_भगवान की चार युग के चार वर्ण अवतार
17.
AUD-20180513-WA0003_Shloka 32-34_आदि लीला और शेष लीला में महाप्रभु का नाम
18.
AUD-20180512-WA0003_Shloka 27-31_कालियुग की प्रथम संध्या का वर्णन _महाप्रभु
19.
AUD-20180511-WA0013_Shloka 24-27_भगवान द्वारा कर्म, व्रत, दान आदि करने का उ
20.
AUD-20180510-WA0015_Shloka 22-23_भगवान के जगत में आने के तीन कारण
21.
AUD-20180509-WA0016_Shloka 20-21_साक्षात साधु संग की आवश्यकता
22.
AUD-20180508-WA0007_Shloka 20-21_आदर्श की आवश्यकता_वैष्णव-जगतगुरु
23.
AUD-20180507-WA0021_Shloka 20-21_महाप्रभु द्वारा प्रेम बाढ़में सभी जीवों को
24.
AUD-20180506-WA0003_Shloka 20-21_तृणादपि सुनीचेन तरोरपि सहिष्णुना_कृष्ण प्र
25.
AUD-20180505-WA0003_Shloka 20-21_हरि नाम का प्रभाव
26.
AUD-20180504-WA0008_Shloka 20-21_कलियुग जीव Vs हरिनाम
27.
AUD-20180503-WA0004_Shloka 29-21_युगभेद के अनुसार तारक ब्रह्म नाम
28.
AUD-20180502-WA0009_Shloka 29-21_श्रीचैतन्य महाप्रभु की प्रतिज्ञा_आचार बिना
29.
AUD-20180501-WA0009_Shloka 17-20_दो प्रकार की सालोक्य आदि चार मुक्तियाँ_ वै
30.
AUD-20180430-WA0012_Shloka 17-18_सायुज्य मुक्ति का वास्तविक तात्पर्य
31.
AUD-20180428-WA0022_Shloka 17-18_वैधभावोत्थ प्रेम_रागभावोत्थ प्रेम
32.
AUD-20180427-WA0000_Shloka 17-18_रागानुग भक्ति का अनुष्ठान
33.
AUD-20180426-WA0013_Shloka 15-16_रागमार्ग का अधिकार_गौड़ीय मठ की भजन प्रणाल
34.
AUD-20180425-WA0009_Shloka 15-16_वैधी भक्ति Vs प्रेमाभक्ति_निजभजन प्रणाली
35.
AUD-20180424-WA0016_Shloka 15-16_वैधी भक्ति के लक्षण
36.
AUD-20180423-WA0012_Shloka 13-16_शुद्ध भक्ति द्वारा जीव का मायिक अभिनिवेश द
37.
AUD-20180422-WA0014_ Shloka 13-16_ऐश्वर्य ज्ञान प्रबल रहने के कारण प्रेम शि
38.
AUD-20180421-WA0014_Shloka 5-14_भगवान् के अवतार का काल
39.
AUD-20180420-WA0015_Shloka 5-6_गोलोक Vs गोकुल
40.
AUD-20180419-WA0021_Shloka 4_स्वभक्तिश्रियं की व्याख्या
41.
AUD-20180417-WA0010_Shloka 4_वात्सल्य रस_ मधुर रस
42.
AUD-20180416-WA0007_Shloka 4_गदाधर पंडित जी का आविर्भाव दिवस_वात्सल्य प्रेम
43.
AUD-20180415_Shloka 4 _व्रज के सखाओं का वैशिष्ट्य
44.
AUD-20180414-WA0006_Shloka 4_व्रज के दास्य भक्तों का वैशिष्ट्य
45.
AUD-20180413-WA0033_Shloka 4_वैकुंठ, अयोध्या, द्वारका, मथुरा एवं व्रज में
46.
AUD-20180412-WA0006_Shloka 4_उन्नत उज्जवल रस
47.
AUD-20180411-WA0016_Shloka 4_पांच प्रकार का रागानुगा भक्ति साधन
48.
AUD-20180410-WA0002_Shloka 4_अनर्पितचरीं चिरात् की व्याख्या
49.
AUD-20180409-WA0008_Shloka 4_रूप गोस्वामी के श्लोक को आशीर्वाद रूप मंगलाचरण
50.
AUD-20180408-WA0003_Shloka 1_ श्रीचैतन्य देव के चरणकमलों की शरण ग्रहण करने


